बेटिंग के 10 गोल्डेन नियम | 10 Golden Rules Of Betting in Hindi

भारत में बेटिंग करने वालों की संख्या दिन पर दिन काफी तेजी से बढ़ रही है। नए बेटर्स को बेटिंग के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी होती है और वे बेट लगाना शुरु कर देते हैं, ऐसी स्थिति में उन्हें कभी कभी नुकसान का भी सामना करना पड़ता है। किसी मैच मे बेटिंग करने से पहले उससे सम्बंधित अपडेट लेना आवश्यक है, ताकि टीम की मजबूती एवं कमजोरी का पता चल सके। बेटिंग करने से पहले आपको जीत हासिल करने के लिए कुछ नियमों का ध्यान देना आवश्यक है। यहां पर हम आपको बेटिंग के 10 गोल्डेन नियम | 10 Golden Rules Of Betting in Hindi बताने जा रहे हैं।

क्रिकेट बेटिंग से सम्बंधित महत्वपूर्ण सुझाव:

यदि आप पहली बार बेटिंग करने जा रहे हैं या फिर इस मामले में अनुभवी हैं, तो भी आप को बेटिंग से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण सुझाव को अपनाना होगा, क्योंकि इससे आपके जीत की सम्भावना बढ़ सकती है। नीचे हम आपको अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा बताए गए कुछ महत्त्वपूर्ण सुझावों के बारे में बताने जा रहे हैं।

1. पिच रिपोर्ट पढ़ें: किसी भी क्रिकेट मैच में पिच का बहुत ही बड़ा महत्व होता है। यह आपको उस मैच के संभावित विजेता का अनुमान लगाने में मदद करता है। पिच रिपोर्ट से आपको यह पता चलता है कि वह बल्लेबाजों के लिए मददगार है या फिर गेंदबाजों के लिए। इसके बाद आप खुद से विजेता का अनुमान लगा सकते हैं।

2. मौसम और तापमान पर विचार करें: क्रिकेट के खेल में मौसम और तापमान भी अपनी अहम भूमिका निभाती है। जैसे किसी मैच से पहले बारिश हुआ हो या फिर मैच के दौरान बारिश हो तो इससे काफी फर्क पड़ता है। बीच में बारिश होने से मजबूत स्थिति में चल रही टीम हार भी सकती है।

3. टीम की स्थिति का अध्ययन करें: यदि आप मैच के पहले बेट लगा रहे हैं तो संभावित टीम के खिलाड़ियों पर विचार करें और मैच के दौरान बेट लगाने की स्थिति में प्लेइंग इलेवन में शामिल खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर विचार करें। मैच से पहले लंबे देर की यात्रा या किसी प्रकार की थकान खिलाड़ी के प्रदर्शन पर असर डाल सकती है।

4. खिलाड़ियों का पिछला प्रदर्शन देखें: बेट लगाने से पहले खिलाड़ी के पिछले प्रदर्शन और उसके फॉर्म को भी देखें। क्योंकि यदि कोई खिलाड़ी बेहतर फॉर्म में चल रहा है तो उसके बेहतर प्रदर्शन की संभावना अधिक है।

5. विशेषज्ञों का विश्लेषण पढ़ें और खुद की रणनीति तैयार करें: कई सारे विशेषज्ञ मैच शुरू होने से पहले इसका विश्लेषण तैयार करते हैं और संभावित विजेता के बारे में बताते हैं। लेकिन आप उनके द्वारा किए गए विश्लेषण पर पूरा निर्भर ना होकर खुद की रणनीति तैयार करें। आप उनके विश्लेषण का प्रयोग सिर्फ अपने ज्ञान के लिए कर सकते हैं।

Read: भारत में क्रिकेट बेटिंग लीगल करने के फायदे एवं नुकसान

यदि आप बेट लगाने से पहले ऊपर बताई गए 5 सुझावों को अपनाते हैं तो आपको बेटिंग सफल हो सकती है। किसी भी नौसिखिए और अनुभवी दोनों प्रकार के बेटर्स के लिए यह सुझाव काफी काम आ सकता है। इसके अलावा बेटिंग शुरू करने के लिए आपको उससे सम्बंधित कुछ जरूरी नियमों को समझना होगा ताकि बेट लगाने के दौरान सफलता मिल सके।

बेटिंग के 10 गोल्डेन नियम | 10 Golden Rules Of Betting in Hindi:

यदि आप बेटिंग में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं, तो आपको बेट लगाने के दौरान कुछ नियमों को ध्यान में रखना होगा। नीचे हम आपको बेटिंग के 10 गोल्डेन नियम | 10 Golden Rules Of Betting in Hindi बताने जा रहे हैं।

1. कम ऑड्स पर बेट ना लगाएं:

बेटिंग के दौरान कम ऑड्स पर बेट लगाना अधिक जोखिम वाला और नुकसानदायक साबित हो सकता है। जैसे यदि आपने भारत और ऑस्ट्रेलिया के मैच में भारत फेवरेट है और आपने 1.60 के ऑड पर भारत को जीताने के लिए ₹10,000 का बेट लगाया है, तो इसमें भारत के जीतने पर सिर्फ ₹6000 ही मिलेंगे, जबकि हारने पर ₹10,000 देना होगा। 

इसके अलावा बुक सेट करने के लिए यदि आप 1.20 (20 पैसे) के ऑड (भाव) पर दूसरे टीम पर बेट लगाते हैं तो आपको सिर्फ ₹4000 का ही फायदा होगा, यानी लगाई गई राशि का सिर्फ ₹40%। इसीलिए किसी फेवरेट टीम पर हमेशा ऊंचे भाव (1.85 से 1.90) पर ही बेट लगाएं, ताकि बुक सेट करने के बाद आपको 60% से लेकर 70% तक का फायदा मिल सके।

Read: भारत के ग्रे मार्केट में बेटिंग कैसे ऑपरेट होता है?

2. धैर्य रखें (Keep Patience):

यदि आपने बेट लगाने से पहले मैच से संबंधित सभी तथ्यों का अध्ययन किया है और आपने किसी एक टीम को जीताने के लिए बेट लगाया है तो धैर्य रखें और अंत तक उसी के साथ बने रहें। कई बार पंटर जिस टीम पर बेट लगाता है और उसके शुरूआत में एक दो विकेट जल्दी गिर जाते हैं और उसका भाव गिर जाता है तो वह जल्दबाजी में बेट को पलटने लगता है। ऐसी स्थिति में उसे दोनों तरफ से नुकसान झेलना पड़ता है। आप हमेशा यह ध्यान रखें कि मैच में कोई एक टीम ही विजेता होगी।

3. अपने निर्णय और ज्ञान का सम्मान करें (Respect Your Decision):

यदि आपने मैच शुरू होने से पहले या फिर मैच के दौरान किसी टीम को जीताने के लिए बेट लगा दिया है, तो अपने निर्णय और ज्ञान का सम्मान करें और उस पर टिके रहें। क्योंकि बेटिंग में रिस्क लेना आम बात है, जरूरी नहीं है कि आपने जो बेट लगाया है वो सफल ही हो लेकिन बार-बार निर्णय बदलने से आपको अधिक नुकसान भी हो सकता है। इसी तरह से सेशन खेलते समय या किसी भी फैंसी बेट में भी यही रणनीति अपनाएं।

Read: पंटर हारने के बावजूद बेटिंग क्यों करता है?

4. प्रत्येक बेट एक समान राशि से होनी चाहिए (Each bet should be of equal amount):

अक्सर पंटर एक बेट हारने के बाद अगली बेट अधिक राशि से लगाता है, जबकि ऐसा करना अधिक नुकसानदायक हो सकता है। क्योंकि यह आवश्यक नहीं है कि आप सभी बेट को जीत सकें। यदि आप किसी दिन सभी बेट हार जाते हैं तो आपको अधिक नुकसान हो सकता है। इसीलिए एक समान राशि से ही सभी बेट लगाएं। यदि आपके पहला बेट ₹500 का लगाया है और उसमें जीत या हार मिली है तो अगली बेट भी ₹500 का ही लगाएं। इससे आप अपनी हार को कम कर सकते हैं साथ ही यदि आपकी रणनीति सफल रही तो ठीक-ठाक जीत भी मिल सकती है।

5. एक सेशन में सिर्फ एक बेट लगाएं (Place Only One Bet in One Session):

यदि आप किसी क्रिकेट मैच में सेशन खेल रहे हैं और मान लीजिए कि आपने 6 ओवर में 45 रन या उससे अधिक बनाने  लिए (Yes या Back) बेट लगाया है, तो उसमें सिर्फ एक ही बेट लगाकर इंतजार करें। ऐसा नहीं कि सेशन गिरकर 40 आ गया है तो उसे भी Yes (Back) कर दें। ऐसे में यदि किसी स्थिति में 40 स्कोर नहीं बना तो आपको दुगुना नुकसान हो जाएगा। इसीलिए एक बेट लगाकर धैर्य रखें। 

इसी तरह से यदि आपने 45 नहीं बनवाने के लिए (Not या Lay) बेट लगाया है तो फिर सेशन बढ़कर 50 तक जाने पर फिर से Not या Lay की बाजी ना लगाएं। क्योंकि 6 ओवर में कभी कभी 50 से अधिक रन भी बन सकता है और फिर आपको दुगुना नुकसान हो सकता है। नुकसान से बचने के लिए आप एक सेशन में सिर्फ एक बेट और एक समान राशि से सभी सेशन में बेट लगाएं।

Read: भारत में बेटिंग वैध (लीगल) क्यों होना चाहिए?

6. एक बेट में कभी भी पूरी राशि न लगाएं (Never put your full amount in a single bet): 

बेटिंग के क्षेत्र में लालच करना आपके लिए सबसे नुकसानदायक साबित हो सकता है। यदि आप की लिमिट ₹10,000 की है तो कभी भी पूरी राशि का एक बेट ना लगाएं, क्योंकि यदि आप वह बेट हार गए तो इसके बाद आपके पास खेलने के लिए पैसे नहीं रहेंगे। ऐसी स्थिति में आप अपने हार को कवर भी नहीं कर पाएंगे। इसीलिए हमेशा अपनी पूरी लिमिट का 10 से 15% राशि ही बेट पर लगाएं, ताकि आप पूरे मैच में बेट लगा सकें।

7. मैच में देर से एंट्री लें (Take Late Entry in The Match):

यदि आप किसी मैच पर बेट लगाना चाहते हैं तो मैच शुरू होने के तुरंत बाद ही बेट लगाना खराब फैसला हो सकता है। देर से एंट्री लेना आपके लिए बेहतर फैसला साबित हो सकता है। इसीलिए सबसे पहले मैच को कुछ ओवरों तक देखें और इसके बाद ही फैसला लें। कभी-कभी मैच की शुरुआत में ही कुछ विकेट गिर जाते हैं जिससे फेवरेट टीम नॉन फेवरेट हो जाती है। 

ऐसे में यह संभव है कि आप जिस टीम पर बेट लगाना चाहते हैं, वह आपको नॉन फेवरेट रेट पर मिल जाए और आप उस पर लगाई (Back) करने के बजाय खाई (Lay) करके अच्छी रकम जीत सकें। देर से मैच में एंट्री लेने का फायदा यह भी है कि कभी कभी आप नॉन फेवरेट टीम पर भी बेट लगा सकते हैं, और मैच का भाव (Odds) बढ़ने पर फेवरेट टीम पर लगाई (Back) करके बुक सेट कर सकते हैं।

Read: कानूनी रूप से अवैध है, लेकिन आप भारत में ऑनलाइन दांव लगा सकते हैं

8. बुक सेट करना जरूरी है (Book Set is Necessary):

बहुत सारे पंटर बुक सेट नहीं करते हैं, क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि उनकी टीम एकतरफा जीत रही है ऐसे में कुछ पैसे गंवाने का कोई फायदा नहीं है। लेकिन मैच का रूख कभी भी पलट सकता है, एक बल्लेबाज कभी भी ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी करके रन चेज कर सकता है और एक गेंदबाज कभी भी कुछ विकेट लेकर मैच में वापसी कर सकता है। 

इसीलिए आपने देखा होगा कि कई बार 1.03 ऑड (03 पैसे) पर नॉन फेवरेट टीम भी जीत जाती है। जैसे लास्ट ओवर में 25 रन चाहिए और बल्लेबाज ने बना दिया या लास्ट ओवर में जीत के लिए 6 रन चाहिए और गेंदबाज ने डिफेंड कर लिया। इस तरह या इसी जैसी कोई भी स्थिति हो सकती है। यदि ऐसा होता है और आप उस समय फेवरेट टीम पर बेट लगाकर निश्चिंत बेटे हैं तो मैच पलटने पर आपको हार मिल जाएगी, जबकि आपके पास अपने पैसे बचाने और अच्छी राशि जीतने का पूरा मौका था।

9. बेटिंग को अपनी लत ना बनाएं (Don’t make your addiction to betting):

बहुत सारे लोगों को बेटिंग की लत लग जाती है और वे किसी भी हाल में हर मैच में बेटिंग करना चाहते हैं। यदि आप हर मैच में बेटिंग करते हैं तो आप कभी भी फायदे में नहीं रह सकते क्योंकि बेटिंग आपको मुनाफे की गारंटी नहीं देता है। कभी मैच आपके मन मुताबिक हो सकता है तो कभी आपके रणनीतियों के विपरीत भी हो सकता है, इसीलिए हमेशा सोच समझकर ही बेट लगाएं। कम मशहूर और सभी मैचों में बेट लगाने से बचें। 

Read: क्रिकेट बेटिंग में पंटर हमेशा क्यों हारता है? इससे कैसे बचे?

10. जिम्मेदारी से बेट लगाएं (Bet Responsibly):

बेटिंग में वित्तीय जोखिम के तत्व शामिल होते हैं इसीलिए सोच समझकर एवं जिम्मेदारी के साथ बेट लगाना बहुत ही आवश्यक है। इस जिम्मेदारी का अनुसरण करने के लिए आपको अपनी खुद की रणनीति भी तैयार करनी होगी और प्रतिदिन बेट करने की एक अधिकतम निश्चित सीमा भी तय करनी होगी। यदि आप एक निश्चित राशि हार गए हैं तो फिर उस मैच को छोड़ दें और अगले मैच के लिए रणनीति बनाएं। 

इसके अलावा बेटिंग करते समय या उससे पहले एल्कोहोल का सेवन ना करें। कभी भी किसी से उधार मांगकर ना खेलें। बेटिंग को अपनी कमाई का प्राथमिक जरिया ना बनाएं, इसका मतलब कि आप बेटिंग पर निर्भर ना रहें। बेटिंग को सिर्फ मनोरंजन का एक हिस्सा समझें। बिना सोचे समझे बेट ना लगाएं और हर मैच से पहले उसका पूरा विश्लेषण करें और फिर बेट लगाएं। हार की स्थिति में धैर्य रखें और अगली बेट के लिए अपनी रणनीति पर कायम रहें।

अन्तिम विचार (Final Thoughts):

यदि आप बेटिंग करना पसंद करते हैं तो ऊपर बताए गए नियम एवं सुझाव आपके लिए बहुत ही काम आएंगे। बेटिंग के क्षेत्र में आपकी जानकारी ही आपकी सफलता का माध्यम बन सकती है। इसीलिए बिना सोचे समझे और बिना किसी मैच की जानकारी के बेट लगाना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। कभी भी कम चर्चित मैचों पर बेट ना लगाएं, क्योंकि उनके बारे में सही तरह से जानकारी नहीं मिल पाती है और इसमें जोखिम अधिक रहता है। इसके साथ ही साथ विशेषज्ञों द्वारा बताए गए जानकारियों को भी पढ़ें और खुद की रणनीति भी तैयार करें।

Read: भारत में Betway पर कैसे ऑनलाइन बेटिंग करे और बेटवे सुरक्षित है या धोखाधड़ी?

Leave a Reply